USA-Russia war, Syria में भिड़े आमने सामने, world war-3 जैसे हालात, पढ़े पूरी रिपोर्ट।

दुनिया की दो महाशक्तियों अमेरिका और रूस के सैनिकों के बीच युद्धग्रस्त पूर्वी सीरिया में ये झड़प हुई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बयान जारी करके कहा है कि यह घटना 25 अगस्त सुबह 10 बजे की है।
इस घटना की वजह से अमेरिका और रूस में टेंशन बढ़ गया है। वर्ल्ड वार 3 के जैसे हालात बन गए है, दोनों देशों की सेना एक दूसरे पर आक्रामक होने का आरोप लगा रही है।
कहां पर हुई घटना
यह घटना सीरिया में हुई है, एशिया महाद्वीप में स्थित इस देेश की आबादी 17 करोड है।
सीरिया की सीमा इराक तुर्की, लेबनान, इजरायल और जॉर्डन से लगती है।यहां पर प्रेसिडेंट हैं बशर अल असद।
सीरिया की राजधानी दश्मिक है। जिसका सबसे बड़ा शहर: अलेप्पो है इस देेश की भाषा: अरबी, इंग्लिश और फ्रेंच है।
कैसे हुई घटना:
बताया जा रहा है कि रूसी सैनिकों ने तेजी से आगे बढ़ते हुए अपने आर्मड व्हेकिल से अमेरिकी सैनिकों को टक्कर मार दी।
रूस ने अमेरिकी सैनिकों को भगाने के लिए अपने दो हेलिकॉप्टर भी लगा दिए थे।
इनमें से एक हेलिकॉप्टर तो अमेरिकी वाहनों के के दायरे में आ गया था।
इस इलाकेे पर अमेरिका और रूस के बीच सीरिया में अक्सर मुठभेड़ होती रहती है। लेकिन इस बार जो हुआ वो ज्यादा गंभीर बात है।
सीरिया में क्यों मौजूद है, अमेरिका और रूस की सेना:
ऐशिया में स्थित देश सीरिया में गृहयुद्ध जैसे हालात है। गृहयुद्ध को सिविल वॉर कहा जाता है।
गृह युद्ध का अर्थ देश के जनता ही आपस में लड़ रही है जनता के अलग-अलग समूह हैं जो लोग सत्ता बदलने के लिए वॉर कर रहे हैं।
यहां के प्रेसिडेंट बशर अल असद के विद्रोही गुट बशर अल असद को वर्ष 2011 से ही सत्ता से हटाना चाहते हैं। विद्रोहियों (सीरिया डेमोक्रेटिक फोर्सेस) का साथ अमेरिका ने दिया। शुरू में हथियार दिए और फिर अपनी फौज वहां तैनात कर दी।
इसके बाद 2015 में विद्रोहियों ने सीरिया के ज्यादातर हिस्से पर कब्जा कर लिया। लगा कि प्रेसिडेंट बशर अल असद अब हटा दिए जाएंगे। अमेरिका ने भी सोचा कि अब सत्ता पलट जाएगी।
उसी वक्त सामने रूस आ गया। बशर अल असद ने रूस से मदद मांगी और फिर रूस ने वहां सेना तैनात कर दी।
अमेरिका और रूस का सीरिया गृह युद्ध को बढ़ावा:
अमेरिका जहां असद के विद्रोहियों को हथियार और आर्थिक मदद उपलब्ध करवा रहा था तो वहीं रूस असद के विद्रोहियों पर बम बरसाकर खुलेआम अमेरिका को चुनौती दे रहा था.
रूस ने इतने बम बरसाए कि अब सीरिया के ज्यादातर बड़े शहरों पर प्रेसिडेंट बशर अल असद की सेना का कब्जा है।
ईरान ने भी सीरिया की मदद की:
ईरान ने भी सीरिया की मदद की।
जिससे अमेरिका बैकफुट पर आ गया। पिछले सात साल में सीरिया में पांच लाख से ज्यादा लोग इस सिविल वॉर में मारे जा चुके हैं।
इसी बीच सीरिया में ISIS का दबदबा बढ़ गया। रक्का में गढ़ बना लिया। अब अमेरिका को रूस से सहमति बनाई कि पहले ISIS को खत्म करते हैं।
2005 में ऐसा पहली बार हुआ था जब एक तरह से रूस के सामने अमेरिका झुका। अमेरिका फिलहाल असद की तुरंत विदाई की अपनी जिद से पीछे हटने पर सहमत हो गया।
ट्रंप ने भी बुलाई सेना:
इसके बाद जब ट्रंप अमेरिका के प्रेसिडेंट बने, तो उन्होंने सीरिया से बहुत सी फौज वापस बुला ली। खासकर जब ISIS का असर सीरिया में कम हो गया।
हालांकि लगभग 500 अमेरिकी सैनिक उत्तरी सीरिया में बनी हुई हैं।
इनमें कुछ क्षेत्रों ऐसे भी हैं जहां तेल संसाधन भी हैं। अक्सर अमेरिकी सेना के साथ अमेरिका समर्थित सीरिया डेमोक्रेटिक फोर्सेस के जवान भी होते हैं।
रूस और अमेरिकी सैनिकों के बीच टेंशन बढ़ा:

यहां पर रूस और अमेरिकी सैनिकों के बीच अक्सर आमना-सामना होता है।लेकिन ऐसा पहली बार है जब अमेरिकी सैनिक घायल हो गए हैं।
अमेरिका ने कहा कि रूसी सेना का ये रवैया अमेरिका और रूस के बीच संघर्ष रोकने के लिए बनाए गए प्रोटोकॉल का उल्लंघन हैं। ईसकी प्रतिबद्धता दिसंबर 2019 में अमेरिका और रूस दोनों ने ही जताई थी।
अमेरिका ने कहा कि वह तनाव को भड़काना नहीं चाहता है।
लेकिन इस तरह की किसी भी आक्रामक कार्रवाई का वह करारा जवाब देगा।
हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि यह घटना पूर्वी सीरिया के ऐसे इलाके में हुई जहां पर रूसी सैनिकों को नहीं होना चाहिए।
तनाव को कम करने के लिए हम उस इलाके से हट गए।अमेरिकी सेना ने बताया अमेरिकी संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल मार्क मिले ने अपने रूसी समकक्ष के साथ बात की। इधर, रूस ने कहा है कि उसके सैनिक काफिले के बारे में पहले ही जानकारी दे दी गई थी अमेरिका को। लेकिन जानबूझकर अमेरिकी फौज वहां आ गई थी।
Reviewed by Devendra Soni
on
अगस्त 29, 2020
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